– उद्देश्य –

मैं उस छेत्र में शिक्षा रूपी दिया जलाने चला हूँ,
जहाँ सदियों से अज्ञानता रूपी अंधेरा है।"


यह उमरन वि०ख० रोहनियां परिक्षेत्र अति पिडे क्षेत्र में स्थापित होने के कारण यहाँ शिक्षा का स्तर शून्य था,
जो शिक्षित व्यक्तियों के लिए अभिशाप था क्यों कि कोई भी शिक्षित व्यक्ति यदि समाज के हित में, समाज के स्तर को
उच्च कोटि का बनाने का प्रयत्न तक न कर सके, तो उसके शिक्षित होने को अर्थ विहीन ही समझा जा सकता है। क्यों कि उच्चकोटि
का समाज होने का अर्थ है लोगों का शिक्षित होना, जिसके कारण व्यक्ति के जीवन में समृद्धि तथा समभाव की व्याप्ति हो सकती है। जहाँ सदियों से अज्ञानता रूपी अंधेरा है।"

इसी उद्देश्य को सार्थक बनाने हेतु नियमित एवं अथक परिश्रम द्वारा स्वामी दयानन्द इण्टर कालेज की स्थापना की गई
जिसमें अनवरत क्षेत्र के कोने-कोने में शिक्षा का बीज प्रस्फुटित कर सैकड़ों छात्र-छात्राएं अज्ञानता रूपी समाज से
निकलकर उच्च शिक्षा प्राप्त करके अपने जीवन के स्तर को उच्चतम ऊंचाइयों तक पहुँचाकर अपने गाँव, क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे है ,
एवं जो कभी अति पिछडे समाज का हिस्सा हुआ करता था आज इस अति पिछडे शब्द को ही इस क्षेत्र से शून्य स्तर तक पहुँचा दिया है।

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